टोक्यो में 13 सितंबर से शुरू होने वाली चैंपियनशिप से पहले नया नियम लागू
मोनाको, 31 जुलाई 2025: वर्ल्ड एथलेटिक्स ने महिला वर्ग में हिस्सा लेने के लिए एक नया और सख्त नियम लागू किया है। अब विश्व रैंकिंग प्रतियोगिताओं, जैसे वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप, में भाग लेने के लिए सभी महिला एथलीट्स को एक बार SRY जीन टेस्ट पास करना होगा। यह टेस्ट जैविक लिंग (बायोलॉजिकल सेक्स) की पुष्टि करता है और इसे गाल के स्वाब या ब्लड टेस्ट के जरिए किया जाएगा। यह नियम 1 सितंबर 2025 से लागू हो रहा है, जो टोक्यो में 13 से 21 सितंबर तक होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए जरूरी होगा। इस फैसले ने खेल जगत में नई बहस छेड़ दी है।
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महिला खेलों की निष्पक्षता के लिए कदम
वर्ल्ड एथलेटिक्स के अध्यक्ष सेबेस्टियन कोए ने कहा, “हमारा उद्देश्य महिला खेलों की अखंडता को बनाए रखना है। यह जरूरी है कि महिलाएं यह मानकर खेल में आएं कि कोई जैविक सीमा नहीं है।” SRY जीन टेस्ट Y क्रोमोसोम की मौजूदगी की जांच करता है, जो जैविक लिंग का एक प्रमुख संकेतक है। कोए ने साफ कहा, “एलिट स्तर पर महिला वर्ग में खेलने के लिए आपको जैविक रूप से महिला होना होगा। लिंग कभी भी जीवविज्ञान से ऊपर नहीं हो सकता।” यह टेस्ट एक बार में ही करना होगा, और इसके परिणाम दो हफ्तों में मिल जाएंगे। वर्ल्ड एथलेटिक्स प्रत्येक टेस्ट के लिए 100 डॉलर तक की लागत वहन करेगा।
नए नियमों की पृष्ठभूमि
इस नियम का आधार मार्च 2025 में गठित जेंडर डायवर्स एथलीट वर्किंग ग्रुप की सिफारिशें हैं। इस ग्रुप ने ट्रांसजेंडर और डिफरेंस ऑफ सेक्स डेवलपमेंट (DSD) एथलीट्स के लिए मौजूदा नियमों को और सख्त करने की सलाह दी थी। वर्तमान में, ट्रांसजेंडर महिलाएं जो पुरुष यौवन से गुजरी हैं, महिला वर्ग में हिस्सा नहीं ले सकतीं। वहीं, DSD वाली महिला एथलीट्स को अपने टेस्टोस्टेरोन लेवल को कम करना होता है। नए नियमों में इन दोनों को एकीकृत कर SRY टेस्ट को अनिवार्य किया गया है।
कास्टर सेमेन्या और विवाद
यह नियम उस विवाद को और हवा दे सकता है, जो 2009 से दक्षिण अफ्रीका की कास्टर सेमेन्या के साथ चल रहा है। दो बार की ओलंपिक 800 मीटर चैंपियन सेमेन्या ने DSD के कारण टेस्टोस्टेरोन कम करने के नियमों के खिलाफ लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। जुलाई 2025 में यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया कि स्विस फेडरल ट्रिब्यूनल में उनकी अपील को ठीक से नहीं सुना गया। हालांकि, यह जीत नियमों को बदलने में कामयाब नहीं हुई। सेमेन्या अब 34 साल की हैं, और उनका करियर प्रभावित हो चुका है।
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भारत के लिए क्या मायने?
भारत की महिला एथलीट्स, जैसे हिमा दास और दुती चंद, जो पहले ही DSD नियमों का सामना कर चुकी हैं, अब इस नए टेस्ट का सामना करेंगी। यह नियम निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए है, लेकिन मानवाधिकार और निजता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। प्रशंसक और विशेषज्ञ इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि यह नीति टोक्यो चैंपियनशिप में भारत की संभावनाओं को कैसे प्रभावित करेगी।
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